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ओंकारेश्वर अद्वैत दर्शन का विश्व स्तरीय केंद्र बनेगा -संस्कृति मंत्री धर्मेन्द्र लोधी

आचार्य शंकर के विचारों को जनजन तक पहुंचाएं "शंकर दूत"_ स्वामी अवधेशानंद गिरि

ओंकारेश्वर अद्वैत दर्शन का विश्व स्तरीय केंद्र बनेगा
-संस्कृति मंत्री धर्मेन्द्र लोधी

आचार्य शंकर के विचारों को जनजन तक पहुंचाएं “शंकर दूत”_ स्वामी अवधेशानंद गिरि

ओंकारेश्वर में 5 दिवसीय “एकात्म पर्व” संपन्न

भोपाल/खण्डवा- 22 अप्रैल 2026

आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास और मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा आदिगुरु शंकराचार्य के प्रकटोत्सव वैशाख शुक्ल पंचमी के उपलक्ष्य में ओंकारेश्वर के मांधाता पर्वत पर स्थित “एकात्म धाम” में “एकात्म पर्व” का पंच दिवसीय भव्य आयोजन मंगलवार को संपन्न हो गया। समापन दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में जूनापीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी, चिन्मय मिशन के स्वामी तेजोमयानंद सरस्वती प्रदेश के पर्यटन एवं
संस्कृति विभाग के मंत्री तथा खंडवा जिले के प्रभारी मंत्री श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, स्वामी पुन्यानंद गिरी महाराज वाराणसी, श्री मां पूर्णप्रज्ञा, महंत मंगलदास त्यागी, स्वयं प्रकाशानंद गिरि महाराज, वेंकटेश्वर वेद विज्ञान पीठम् के प्राचार्य ब्रह्मर्षि कुप्प शिव सुब्रमण्यम अवधानी, गुजरात के शिक्षाविद श्री गौतम भाई पटेल सहित विभिन्न सतंजन मौजूद थे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने जगतगुरु आदिशंकराचार्य के चित्र पर पुष्प वर्षा और माल्यार्पण कर किया। कार्यक्रम में गुजरात के शिक्षाविद श्री गौतम भाई पटेल और चिन्मय मिशन के स्वामी तेजोमयानंद सरस्वती को “शंकर अलंकरण” सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में संबोधित करते हुए प्रभारी मंत्री श्री लोधी ने कहा कि ओंकारेश्वर में लगभग 2400 करोड रुपए लागत से “अद्वैत लोक” का निर्माण शुरू हो चुका है। ओंकारेश्वर एकात्मकता के अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रभारी मंत्री श्री लोधी ने कहा कि ओंकारेश्वर में आचार्य शंकर की 108 फीट ऊंची ‘एकात्मता की मूर्ति’, शंकर संग्रहालय और अंतर्राष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान की स्थापना का कार्य तीव्र गति से जारी है। उन्होंने कहा कि जनवरी से अप्रैल 2027 तक आदि शंकराचार्य के जन्म स्थान कालड़ी, केरल से केदारनाथ तक लगभग 17 हजार किलोमीटर की “एकात्म यात्रा” आयोजित की जाएगी। उन्होंने बताया कि ओंकार पर्वत पर 38 हेक्टेयर क्षेत्र में 40 हजार पौधे लगाकर “अद्वैत वन” विकसित किया जा रहा है । प्रभारी मंत्री श्री लोधी ने इस अवसर पर कहा कि
अद्वैत लोक में डिजिटल लाइब्रेरी का निर्माण किया जाएगा, जिसमें आदि शंकराचार्य रचित प्राचीन ग्रंथों की डिजिटल पांडुलिपि उपलब्ध रहेगी। ओंकारेश्वर में लेजर एंड साउंड शो शुरू किया जाएगा, जिसमें संध्या काल में नर्मदा तट पर आदिशंकराचार्य के जीवन दर्शन पर केंद्रित जानकारी श्रद्धालुओं को दी जाएगी।

 

प्रभारी मंत्री श्री लोधी ने इस अवसर पर कहा कि ओंकारेश्वर में मांधाता पर्वत पर बनने वाले अद्वैत लोक में ध्यान और साधना का केंद्र भी स्थापित किया जाएगा। अद्वैत लोक में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। चित्रकला, मूर्ति कला और संगीत पर आधारित कार्यशालाएं आयोजित होगी। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक यहां से केवल सेल्फी लेकर ही नहीं जाएंगे, बल्कि “एकात्मक का ज्ञान” लेकर भी जाएंगे। प्रभारी मंत्री श्री लोधी ने इस अवसर पर कहा कि आदि शंकराचार्य के उपदेश आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि एकात्मक पर्व आयोजन का उद्देश्य यह है कि जगतगुरु आदिशंकराचार्य की शिक्षाएं और उपदेश घर-घर तक पहुंचे।

 

कार्यक्रम में संबोधित करते हुए स्वामी अवधेशानंद गिरी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का भी आभार प्रकट किया जिन्होंने ओंकारेश्वर में एकात्म धाम की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार “एकात्म धाम” और “अद्वैत लोक” की स्थापना के लिए बधाई की पात्र है। स्वामी अवधेशानंद गिरि ने अपने वक्तव्य में एकात्मता के वैश्विक संदेश को प्रसारित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब शंकरदूत केवल भारत तक सीमित न रहें, बल्कि आचार्य शंकर भगवत्पाद का संदेश लेकर विश्व के प्रत्येक कोने तक पहुँचें। कार्यक्रम के अंत में स्वामी अवधेशानंद गिरि ने उपस्थित गणमान्य नागरिकों को “एकात्मता का संकल्प” भी दिलाया। इससे पूर्व स्वागत भाषण और न्यास की प्रस्तावना देते हुए उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी, आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास डॉ. शैलेन्द्र मिश्रा ने कहा कि ओंकारेश्वर को एकात्मता के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

 

कार्यक्रम में वीडियो संदेश के माध्यम से जगद्गुरु श्रृंगेरी शंकराचार्य विधुशेखर भारती के आशीर्वचन भी प्राप्त हुए, उन्होंने कहा कि ऐसे प्रकल्पों की आज अत्यंत आवश्यकता है, जो आदि शंकराचार्य के विचारों को वैश्विक स्तर तक पहुँचाएं। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य ने पूरे भारत को एक सूत्र में बाँधने के लिए चारों दिशाओं में 4 पीठों की स्थापना की, जहाँ से एकता और अद्वैत का संदेश प्रसारित हुआ।

 

स्वामी तेजोमयानंद सरस्वती ने इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए कहा कि यदि शंकराचार्य का प्राकट्य न हुआ होता, तो मानव अज्ञान के अंधकार में ही डूबा रहता।
दक्षिणामूर्ति मठ, वाराणसी के प्रमुख स्वामी पूर्णानंद गिरि ने अद्वैत वेदांत की परंपरा और उसके साधना पक्ष को स्पष्ट करते हुए कहा कि जब वर्तमान समय में पूरी दुनिया विनाश की कगार पर खड़ी है, तब भी भारत विश्व में सुख और शांति का अनुभव कर रहा है। यह शंकराचार्य जैसे महान संतों के चरण विन्यास और उनके प्रभाव का ही फल है कि इस भूमि ने पवित्रता प्राप्त की है, और आज के समय में भी हम शांति की अनुभूति कर रहे हैं जो कोई साधारण बात नहीं है। स्वामिनी सद्विद्यानंद सरस्वती ने सभी सत्रों का सार प्रस्तुत करते हुए अद्वैत की समृद्ध परंपरा और विभिन्न संप्रदायों के योगदान को रेखांकित किया।

नर्मदा तट पर 700 से अधिक युवा ‘शंकरदूत’ के रूप में दीक्षित हुए

वैशाख शुक्ल पंचमी पर जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि एवं अन्य संतो की उपस्थिति में मंगलवार को प्रातः 6 बजे नर्मदा तट पर आयोजित दीक्षा समारोह में देश-विदेश के 700 से अधिक युवा ‘शंकरदूत’ के रूप में दीक्षित हुए।

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