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आदिवासी अंचल की मिट्टी का लाल *राजनेैतिक सम्राट योद्धा – उमंग सिंघार*

*शख्स की जुबानी* *"यारों का यार है, सबका मददगार है, यही सिंघम यही सिंघार है।"

*शख्स की जुबानी* *”यारों का यार है, सबका मददगार है, यही सिंघम यही सिंघार है।”

आदिवासी अंचल की मिट्टी का लाल *राजनेैतिक सम्राट योद्धा – उमंग सिंघार

भोपाल(राहुल अग्रवाल)-30/5/26

बात उस समय की है जब धार जिले के छोटे से कस्बे आदिवासी अंचल की मिट्टी के लाल को टुकटुकी लगाकर निहार रहा था, जब उनसे मिलने कुछ बुजुर्ग, महिलाएं, युवा उनके सरकारी निवास पर आए। कितनी सादगी से वह उनकी बात सुन रहे थे और जिसकी जो समस्या थी लोग उन्हें बता रहे थे और उसी सादगी के अंदाज में लोगों की बात सुनकर उनका तत्काल निराकरण करना लोगों के दिल को छू गया।

 

हां बात में प्रदेश ही नहीं देश भर में बुआजी के नाम से प्रसिद्ध स्व. जमुना देवी के उस भतीजे की कर रहा हूं जो केवल आदिवासी समुदाय ही नहीं बल्कि प्रदेश की आवाम, उनके हक और अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए शेर का जिगर रखता है।
बात यही नहीं रुकती जब भी वो जिलों में भ्रमण पर जाते हैं और लोगों की समस्याएं सनते हैं, नि:संकोच वे तत्काल उनकी मदद करते हैं। बच्चों के लिए तो वह ऐसे भावविभोर हो जाते हैं जैसे कि वह खुद ही बच्चे बन जाते हैं। बच्चों से उनकी इच्छा जानकर पढ़ाई की जरूरत की सामग्री उपलब्ध मैं उनका कोई सानी नहीं हैं। वे बुजुर्गों के लिए चाहे उनकी पेंशन केी समस्या, दिव्यांगों के लिए ट्राई साइकिल केी समस्या, महिला हो या युवा सभी की समस्याओं का तत्काल निराकरण करते हैं। एक नहीं ऐसे हजारों उदाहरण हैं जब वे सीधे जनता से संवाद कर उनकी समस्याओं का निराकरण करते नजर आते हैं।
जी हां, राजनीति में कुछ चेहरे केवल नेता रूपी नहीं होते, बल्कि वे संघर्ष, साहस और जनविश्वास की पहचान बन जाते हैं और आदिवासी अंचल की मिट्टी से निकाला ऐसा ही एक नाम है *राजनेैतिक सम्राट योद्धा उमंग सिंघार* का।

 

यह जननायक राजनेैतिक सम्राट योद्धा प्रदेश की राजनीति में एक मजबूत, आक्रामक और जनहितैषी नेतृत्व के रूप में स्थापित हो चुका है। जिनकी राजनीति केवल सत्ता तक सीमित नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों और सामाजिक न्याय की लड़ाई का माध्यम बन गई है।

 

 

राजनेैतिक सम्राट योद्धा उमंग सिंघार का व्यक्तित्व एक ऐसे योद्धा का है जिसने अनुभव, संघर्षों और स्वयं के विश्वास को अपनी ताकत बनाया। यह सम्राट योद्धा उन नेताओं में शुमार हैं जो सड़क से लेकर विधानसभा के पटल तक आम जनता की आवाज को मुद्दों और मजबूती के साथ बुलंद करते हैं। विपक्ष में रहते हुए इस योद्धा की आक्रामक कार्यशैली और सत्ता से सीधे सवाल पूछने का अंदाज उन्हें अलग पहचान देता है।उनकी भाषा में जहां एक और जनता के हक और अधिकार के लिए आक्रामकता होती है वहीं जनता के दर्द की संवेदना भी बखूबी झलकती है।

 

आदिवासी समाज ही नहीं, किसानों, वृद्धो, युवाओं, महिलाओं, मजदूर, मजबूर और गरीब वर्ग के मुद्दों को उन्होंने हमेशा प्राथमिकता दी, जिसको जो आवश्यकता रही तत्परता के साथ उसका सहयोग किया।
इस राजनेैतिक सम्राट योद्धा का उदय केवल संगठनात्मक ताकत से नहीं, बल्कि जनता के बीच लगातार सक्रिय रहने से हुआ। वे उन नेताओं में एक बिरले नेता है जो गांवों की धूल भरी पगडंडियों से लेकर बड़े राजनीतिक मंचों तक समान ऊर्जा के साथ दिखाई देते हैं।

 

संगठन में उनकी नेतृत्व क्षमता और जनाधार को देखते हुए राष्ट्रीय नेतृत्व ने उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी सौंपीं और अब वर्तमान में मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में उनकी भूमिका ने उन्हें प्रदेश केी राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया। सत्ता पक्ष पर तीखे प्रहार, मुद्दों की स्पष्ट समझ और जनता के प्रश्नों को प्रभावशाली ढंग से उठाने की कला ने उन्हें कांग्रेस का मजबूत स्तंभ बना दिया है और अब प्रदेश की जनता भी उमंग सिंघार को *राजनीतिक सम्राट योद्धा* नाम से जान रही है।

 

इस सम्राट योद्धा की राजनीति में एक विशेष बात यह है कि वह केवल भाषणों के नेता नहीं हैं, अपितु आंदोलन की राजनीति को जीवित रखने वाले नेता हैं। बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, आदिवासी अधिकारों, युवाओं के भविष्य पर मंडरा रहे संकट जैसे अनेकों जनहित के मुद्दों पर सरकार से उनका संघर्ष लगातार दिखाई देता है। यही कारण है कि युवा वर्ग उन्हें एक संघर्षशील और निडर राजनेैतिक सम्राट योद्धा (नेता)के रूप में देखता है।
इस राजनीतिक सम्राट योद्धा की छवि ऐसी है जो विरोध के कठिन समय में भी पीछे हटना नहीं जानता। राजनीतिक हमलों, चुनौतियों और दबावों के बीच भी उनका आत्मविश्वास जरा भी डगमगाता नहीं है और उनकी यह संघर्षशीलता ही उन्हें “राजनीतिक सम्राट योद्धा” की पहचान देती है। वे केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि जनता के हक और अधिकार की लड़ाई लड़ने के लिए राजनेैतिक सम्राट योद्धा रूपी मिशाल बन चुके हैं।
आज जब राजनीति में वैचारिक स्पष्टता और जनसरोकार कम होता जा रहा हैं, तब राजनीतिक सम्राट योद्धा उमंग सिंघार जैसे नेता लोकतांत्रिक संघर्ष की उम्मीद जगाते हैं। उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि जमीन से जुड़ा हुआ नेता ही जनता के दिलों पर राज कर सकता है। संघर्ष, साहस और जनसेवा ही सच्चे मायने में उन्हें मध्य प्रदेश की राजनीति का एक प्रभावशाली योद्धा बनाती है।
उमंग सिंगार हमेशा एक ही बात बोलते हैं हमेशा जनता से जुड़े रहें और जनता की समस्याओं को उठाते रहे , उनकी मदद करते रहें फिर आपको कोई भी परास्त नहीं कर सकता, चाहे वह जंग का मैदान हो या राजनीति और इसी की परिणिति है कि आज तक इस योद्धा को राजनीतिक अखाड़े में कोई परास्त नहीं कर सका। राजनीतिक सम्राट योद्धा उमंग सिंघार से जो भी मिलने जाता है वह उनकी आभा का कायल हो जाता है जो भी जिस समस्या को लेकर जाता है वह वहां से कभी भी खाली हाथ, हताश और निराश होकर नहीं लौटता है। यकीन नहीं तो एक बार उनसे मिलकर देखिए।

 

शख्स की जुबानी *”यारों का यार है, सबका मददगार है, यही सिंघम यही सिंघार है।”*
मध्य प्रदेश की राजनीति में शेर का जिगर रखने वाला उमंग सिंघार जैसा *राजनीतिक सम्राट योद्धा* कभी ना तो मिला है और न ही मिलेगा।विपिन कोरी

स्वतंत्र लेखक

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