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भोपाल नगर निगम में करोड़ों का ‘सॉफ्टवेयर घोटाला’

लोकायुक्त का बड़ा छापा, अपर आयुक्त (वित्त) समेत अन्य पर एफआईआर

भोपाल नगर निगम में करोड़ों का ‘सॉफ्टवेयर घोटाला’

लोकायुक्त का बड़ा छापा, अपर आयुक्त (वित्त) समेत अन्य पर एफआईआर

​भोपाल(राहुल अग्रवाल)–13/3/26

राजधानी भोपाल के नगर निगम में भ्रष्टाचार का एक बड़ा और सनसनीखेज मामला सामने आया है। लोकायुक्त पुलिस ने नगर निगम के अपर आयुक्त (वित्त) गुणवंत सेवितकर और अन्य अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ करोड़ों रुपये के फर्जी भुगतान और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। लोकायुक्त की टीम ने नगर निगम के सर्वर रूम पर छापा मारकर SAP सॉफ्टवेयर की हार्डडिस्क जप्त कर ली है।

​फर्जी बिल और SAP सॉफ्टवेयर का खेल

​शिकायत के अनुसार, अपर आयुक्त (वित्त) गुणवंत सेवितकर ने अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर एक सुनियोजित साजिश रची। आरोपियों ने नगर निगम की केन्द्रीय कर्मशाला (मोटर वर्कशॉप), जल कार्य विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग में बिना कोई काम कराए फर्जी ई-बिल तैयार किए।

​इन फर्जी बिलों को SAP सॉफ्टवेयर के माध्यम से सिस्टम में डाला गया और करोड़ों रुपये की राशि अपने परिचितों एवं रिश्तेदारों की फर्जी फर्मों के खातों में स्थानांतरित कर दी गई। गाड़ियों के रंग-रोगन और मरम्मत के नाम पर भी भारी भरकम कमीशन खोरी का आरोप है।

​लोकायुक्त की सख्त कार्रवाई

​पुलिस महानिदेशक (लोकायुक्त) योगेश देशमुख के निर्देश और डीआईजी मनोज कुमार सिंह के मार्गदर्शन में इस शिकायत का गोपनीय सत्यापन कराया गया। एसपी लोकायुक्त दुर्गेश राठौर ने पुष्टि की कि प्राथमिक जांच में संज्ञेय अपराध पाया गया है।

 

लोकायुक्त पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित 2018) की धारा 7, और आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (दस्तावेजों की कूटरचना) एवं 120B (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

​डिजिटल साक्ष्यों की जप्ती

​मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकायुक्त टीम ने माननीय न्यायालय से सर्च वारंट प्राप्त किया। इसके बाद नगर निगम के सर्वर सेंटर की सघन तलाशी ली गई। जांच टीम ने SAP सॉफ्टवेयर की हार्डडिस्क को अपने कब्जे में ले लिया है, जिसमें फर्जी भुगतानों का पूरा कच्चा चिट्ठा होने की उम्मीद है।

इस महत्वपूर्ण कार्रवाई में उप पुलिस अधीक्षक बी.एम. द्विवेदी, आर.के. सिंह, निरीक्षक कवीन्द्र सिंह चौहान, रजनी तिवारी और सायबर टीम के विशेषज्ञ शामिल रहे।

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