12वां भोपाल विज्ञान मेला : दूसरे दिन विज्ञान संवाद, नवाचार, कार्यशाला और नाट्य प्रस्तुति ने बढ़ाई चमक

12वां भोपाल विज्ञान मेला : दूसरे दिन विज्ञान संवाद, नवाचार, कार्यशाला और नाट्य प्रस्तुति ने बढ़ाई चमक
भोपाल(राहुल अग्रवाल)–29/9/25
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय परिसर में जारी 12वें भोपाल विज्ञान मेले के दूसरे दिन ज्ञान, संवाद और नवाचार की अनूठी झलक देखने को मिली। दिन की शुरुआत सीधे संवाद के दूसरे चरण से हुई, जिसमें मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्व निदेशक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डी. पी. दुबे मुख्य वक्ता रहे। वरिष्ठ वैज्ञानिक निपुण सिलावट ने भारतीय विज्ञान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पारंपरिक विज्ञान को युगानुकूल और विदेशी विज्ञान को देशानुकूल होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अमेरिका के राष्ट्रगान में भारत की तकनीक का उल्लेख मिलता है। श्री दुबे ने मेले को “भारत में ज्ञान की पराकाष्ठा का उत्सव” बताया और विद्यार्थियों से संवाद करते हुए मौसम, जलचक्र, मानसून की हवाओं और बादलों की गति जैसी जटिल प्रक्रियाओं को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया।
राजा रामन्ना केंद्र की प्रदर्शनी भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रही। केंद्र ने लेज़र, कण त्वरक, क्रायोजेनिक्स और प्रकाशिकी तकनीक से जुड़े नवाचार प्रदर्शित किए। दर्शकों ने तरल नाइट्रोजन के प्रयोगों के माध्यम से पदार्थ की अवस्थाओं में परिवर्तन का अनुभव किया, जिसमें –196° सेल्सियस पर जमे केले से कील ठोकना प्रमुख आकर्षण रहा। मेडिकल प्रौद्योगिकी में कैंसर की प्रारंभिक पहचान वाले उपकरण, नाक और कान निरीक्षण यंत्र और अग्नि रक्षक तकनीक प्रदर्शनी के मुख्य आकर्षण बने।
सांस्कृतिक मंच पर रवीन्द्रनाथ टैगोर नाट्य विद्यालय के छात्रों ने प्रो. चेतन नाटले के निर्देशन में “भारत का विज्ञान, भारत के लिए विज्ञान” विषयक नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। इसमें आर्यभट्ट की शून्य और पाई की खोज, सी. वी. रमन के रमन प्रभाव और इसरो की नवीनतम उपलब्धियों को दर्शाया गया। साथ ही नैनोप्लास्टिक और पर्यावरणीय खतरों के प्रति जन-जागरूकता का संदेश दिया गया। विद्यालयों और महाविद्यालयों के नवाचार में SPS के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत ईकोनेस्ट, स्मार्ट कृषि मॉडल मडी बडी और फील्ड गार्डियन, LNCTS का एग्रो स्मार्ट, सड़क सुरक्षा मॉडल वाहन अति-भार नियंत्रण यंत्र और ड्राइवर जागृति यंत्र प्रमुख रहे। कार्मेल कॉन्वेंट स्कूल की छात्राओं ने गन्ने के अवशेष से पर्यावरण अनुकूल फ्रिज तैयार किया, जो सस्ता, टिकाऊ और खाद में परिवर्तित होने योग्य है।
इस दिन शिक्षकों के लिए आयोजित ज्ञान सेतु कार्यशाला में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर पंकज गोदारा मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई को रचनात्मक बनाने और उनके मन में उत्सुकता जगाने पर जोर दिया।
गोदारा ने गणित को याद करने वाला नहीं, बल्कि पैटर्न समझने वाला विषय बताया और गणितीय प्रक्रियाओं को प्रैक्टिकल दृष्टिकोण से समझाया। कार्यशाला में विज्ञान और आवाज़ की थ्योरी पर अधिक प्रायोगिक प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा, उन्होंने अपनी पुस्तक “भारत में विज्ञान की उज्जवल परंपरा” से शिक्षकों को परिचित कराया, जिसमें 20 प्रमुख विज्ञान विषयों पर प्रकाश डाला गया। वक्ता रत्नेश सिंह ने भारतीय विज्ञान परंपरा और शिक्षा की मौलिक पहचान पर जोर देते हुए कहा कि पश्चिम की नकल करते-करते हम अपनी सांस्कृतिक और वैज्ञानिक पहचान खो रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर और विश्वगुरु बनाने के लिए अपनी शिक्षा और विज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करना आवश्यक है। भोपाल विज्ञान मेला 29 सितम्बर तक बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के हेलीपैड मैदान और ज्ञान-विज्ञान भवन परिसर में प्रतिदिन आयोजित होगा।




