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मध्यप्रदेश ने “अभिलेखीय यात्रा” के माध्यम से मनाया अंतरराष्ट्रीय अभिलेख दिवस

मध्यप्रदेश ने “अभिलेखीय यात्रा” के माध्यम से मनाया अंतरराष्ट्रीय अभिलेख दिवस

 

भोपाल(राहुल अग्रवाल)–09/6/2025

मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालित संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय द्वारा अंतरराष्ट्रीय अभिलेख दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम “अभिलेखीय यात्रा” का आयोजन राज्य संग्रहालय, श्यामला हिल्स, भोपाल में किया गया।जिसमें बड़ी संख्या में अभिलेख प्रेमियों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों ने भाग लिया।कार्यक्रम का शुभारंभ संचालनालय की संयुक्त संचालक डॉ. मनीषा शर्मा द्वारा किया गया। अपने प्रेरणास्पद वक्तव्य में उन्होंने कहा कि “अभिलेख केवल इतिहास नहीं, समाज की आत्मा होते हैं। उनका संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।” उन्होंने अभिलेखों के ऐतिहासिक, शैक्षणिक एवं शोधात्मक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर डॉ. रमेश यादव (पुरातत्वविद्) ने भी दस्तावेजों की ऐतिहासिक प्रासंगिकता और वर्तमान शोध में उनके योगदान को रेखांकित किया।पुरालेख अधिकारी पी एस मीणा द्वारा अभिलेख दिवस मनाने व उसके महत्व के सम्बंध में बताया कि अभिलेख हमारी विरासत, संस्क्रति से परिचित कराते है । उन्होंने बताया कि अंतर राष्ट्रीय अभिलेखागार परिषद का गठन 1948 में हुआ जिसकी प्रथम बैठक 9 जून 1948 को पेरिस फ्रांस में हुई थी जिसकी याद में 2008 से हर बर्ष 9 जून को विश्व अभिलेख दिवस मनाया जाता है ।कार्यक्रम में विशेष अतिथियों के रूप में भोपाल स्थित राष्ट्रीय अभिलेखागार भोपाल के सहायक निदेशक मुमताज़ बेग, पुरातत्व विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी बी.के. लोखंडे तथा नरसिंहगढ़ से पधारे एस.पी. व्यास की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने अपनी सहभागिता से आयोजन की गरिमा को और भी बढ़ाया।

कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएँ:

दुर्लभ दस्तावेजों की प्रदर्शनी:

मध्यप्रदेश अभिलेखागार में सरक्षित 6.88 करोड़ से अधिक ऐतिहासिक दस्तावेजों में से चयनित विशेष एवं दुर्लभ अभिलेखों को प्रदर्शित किया गया। इन दस्तावेजों में प्रदेश की प्रशासनिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को उजागर किया।

विषयगत स्टॉल्स:

तीन प्रमुख स्टॉल— संरक्षण (कंजर्वेशन) एवं डिजिटलीकरण एवं अभिलेख से सम्बंधित लगाए गए, जिनमें दस्तावेजों को संरक्षित रखने की नवीनतम तकनीकों और डिजिटलीकरण प्रक्रियाओं को प्रदर्शित किया गया। इन स्टॉल्स पर जानकारी रविकांत शर्मा एवं  ज्योति विभास द्वारा दी गई। पी.एस. मीना पुरालेख अधिकारी और सैयद नईमुद्दीन (भाषा विशेषज्ञ) द्वारा प्रदान की गई।

अभिलेख विशेषज्ञों से संवाद:

संवादात्मक सत्र के अंतर्गत वरिष्ठ अभिलेख विशेषज्ञ  बेग साहब, निलेश लोखंडे (उप संचालक, अभिलेखागार) तथा अन्य विशेषज्ञों ने शोध, संरक्षण और अभिलेखीय उपयोगिता पर विचार साझा किए।

तीन प्रमुख दीर्घाओं का मार्गदर्शित भ्रमण:

1.प्रिंसली स्टेट गैलरी

2. 1857 का स्वतंत्रता संग्राम

3. पांडुलिपि दीर्घा

वाकणकर स्मृति फोटो बूथ:

पुरातत्व जगत के पुरोधा वाकणकर जी की स्मृति में स्थापित विशेष फोटो बूथ दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहा।”अभिलेखीय यात्रा” का उद्देश्य समाज में ऐतिहासिक दस्तावेजों के संरक्षण, डिजिटलीकरण, उपयोगिता एवं शोध में उनकी भूमिका को रेखांकित करते हुए जनजागरूकता को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम को प्रतिभागियों एवं आगंतुकों द्वारा अत्यंत सराहा गया और यह आयोजन अपनी सूचनात्मक, शिक्षाप्रद एवं प्रभावी प्रस्तुतियों के कारण स्मरणीय बन गया।

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