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‘महिलाएं और सुरक्षा’–पूनम श्रीवास्तव

‘महिलाएं और सुरक्षा’

वर्तमान समय में महिलाएं कितनी सुरक्षित है ?

यह एक ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है,हर आयु वर्ग की  महिला समाज से पूछ रही है कि हम कितनी सुरक्षित है ? हमारा भारत और हमारा समाज इतना विकास कर रहा है। लेकिन महिलाओं पर होने वाले अत्याचार दिन ब दिन बढ़ते ही जा रहे हैं मानव भौतिक उन्नति कर रहा है लेकिन संस्कार विहीन होता जा रहा है वर्तमान समाज में ना नवजात बालिका सुरक्षित है ना ही वृद्धा । कहने के लिए तो हम आधुनिक है।आधुनिक समाज में है , महिलाओं को बराबरी का दर्जा मिला हुआ है उन्नति कर रही है, विकास कर रही है । किंतु उन पर होने वाले शारीरिक अत्याचार जिसमें यौन शोषण, बलात्कार, मानसिक उत्पीड़न बढ़ता ही जा रहा है । यदि हम सुरक्षा की बात करें तो,हमारे ही देश में सुरक्षा के लिए कई संस्थाएं हैं उसके बावजूद महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों में कोई कमी नहीं है ।जितनी ज्यादा सुरक्षा के लिए संस्थान बढ़ रहें है उतने ही ज्यादा उन पर अत्याचार भी बढ़ते ही जा रहे हैं। महिलाएं ना बस में सुरक्षित है, 16 दिसंबर की वह काली रात जिसमें निर्भया के साथ बस में ही अमानवीय अत्याचार होता है, जिसमें उसके शरीर के अंग प्रत्यंग को कुचल कर रख दिया गया एक नारी के साथ ऐसा घोर अपराध किया गया जो शायद किसी जानवर के साथ भी ना किया जाता होगा ।

नारी कितनी सुरक्षित है

इस देश में इस पर एक सवाल खड़ा करता है अगर हम कहें कि महिलाएं अपने कार्यस्थल पर सुरक्षित है, तो कोलकाता में एक ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुई घटना हमारे रोंगटे खड़े कर देती है, क्योंकि उसके संग अत्याचार उसी के साथियों ने उसी के कार्य स्थल पर किया जिसमें उसको निर्दयतापूर्वक मार दिया गया उसके शरीर के हर हिस्से को तोड़ दिया गया । अब सवाल यह उठ खड़ा होता है कि, जब महिलाएं न कार्य स्थल पर सुरक्षित है, ना घर में सुरक्षित है, ना बस में सुरक्षित है, ना ट्रेन में सुरक्षित है, ना सड़क पर सुरक्षित है, तो फिर महिलाएं कहां सुरक्षित है

वह कौन सा स्थान है जहां पर एक महिला, एक बालिका, एक नव युवती अपने आप को सुरक्षित समझे कुछ दिन ही पूर्व भोपाल की एक घटना जो एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में हुई थी वहां एक अबोध बालिका के साथ अत्याचार हुआ अत्याचार करने वाले उसी के बस का ड्राइवर था । बालिका ना प्रतिष्ठित संस्थानों में जहां माता-पिता बहुत ज्यादा शिक्षण शुल्क अदा करते हैं वहां सुरक्षित हैं ना सामान्य स्कूलों में सुरक्षित है ना कार्य स्थल में सुरक्षित है महिलाओं की सुरक्षा एक गंभीर समस्या है जिस पर समाज को और सरकार को ध्यान देना चाहिए यदि यही स्थिति रही तो महिलाएं घर से निकलना बंद कर देंगी लगता है कि प्राचीन समय में शायद इसी तरह का माहौल रहा होगा,इसीलिए महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलने दिया जाता था क्योंकि हर तरफ एक भेड़िया बैठा हुआ है जो उनको नोचने के लिए के लिए तैयार है ऐसा नहीं है कि महिलाएं घर में सुरक्षित है महिलाओं पर जितने अत्याचार घर में होते हैं उतने अत्याचार तो कहीं नहीं होते। यह बात और है कि वह अत्याचार के बारे में किसी को बताती नहीं है कभी माँ उसका मुंह बंद कर देती है तो,कभी वह खुद ही चुप हो जाती है और चुपचाप अपनी किस्मत समझकर अत्याचार सहती रहती है। अब फिर वही सवाल उठता है कि आखिर इन अत्याचारों का अंत कब होगा कब एक नारी खुले आसमान में अपने आप को सुरक्षित समझकर श्वांस ले सकेगी । इस विषय पर मेरा विचार है कि नारी तब तक सुरक्षित नहीं हो सकती जब तक कि वह खुद सुरक्षित होना ना चाहें।वह अपने अंदर की शक्ति को पहचाने नारी अबला नहीं सबला है, दुर्गा है शक्ति का रूप है नारी शक्ति का रूप है नारी इस सृष्टि की सृजनकृता है जिस दिन वह यह बात समझ जाएगी वह सुरक्षित हो जाएगी समाज को भी यह समझने की जरूरत है नारी कोई भोग् की वस्तु नहीं है वह भी एक सामाजिक प्राणी है उसका भी सुरक्षा पर, सम्मान पर उतना ही अधिकार है जितना किसी अन्य मानव का जितनी जल्दी समाज इस बात को समझ लेगा, नारी की सुरक्षा का मुद्दा सुलझ जाएगा पुरुष की तरह ही नारी भी समान सम्मान की अधिकारणी हो जाएगी । हम एक सुरक्षित स्वस्थ समाज देश और विश्व की कल्पना कर पाएंगे । तभी सही अर्थों में भारत विकासशील देश होगा और विश्व विकसित होगा जब हर नारी सुरक्षित होगी अपने आत्मसम्मान के साथ अपने स्वाभिमान के साथ और अपने नारीत्व के साथ। यह मेरे व्यक्तिगत विचार है क्योंकि मेरी कल्पनाओं का संसार, ऐसा देश ही हो जहां हर नारी सुरक्षित हो हर बालिका खिल-खिलाकर हंँसे और उसकी हंसी की आवाज से पूरा ब्रह्मांड आनंदित हो जाए । अंततः यह मेरे व्यक्तिगत विचार है जरूरी नहीं है कि, सब इससे सहमत होये ।

○ लेखक पूनम श्रीवास्तव 

○ महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकार के द्वारा बनाई गई संस्थाओं के नंबर जिन पर महिला कॉल करके अपने लिए सुरक्षा की मांग कर सकती है निम्न है

○ 1091

○ 181

○ 1098

○ 1090

○ 1076

○ one stop centre

○ 112

○ acid attack 011-23237166

○ 100

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