कृषि संविदा अधिकारी कर्मचारी संघ ने कृषि मंत्री से लगाई समकक्षता एवं वेतन निर्धारण करने की गुहार

कृषि संविदा अधिकारी कर्मचारी संघ ने कृषि मंत्री से लगाई समकक्षता एवं वेतन निर्धारण करने की गुहार
भोपाल(राहुल अग्रवाल)–3/9/25
कृषि विभाग की सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल आत्मा योजनान्तर्गत संविदा पर नियुक्त कर्मचारियों की समकक्षता का निर्धारण विगत 02 वर्ष से नहीं किया गया है इस कारण उक्त कर्मचारी कृषि संविदा अधिकारी कर्मचारी संघ के बेनर तले समकक्षता का निर्धारण को लेकर भोपाल में कृषि मंत्री ऐंदल सिंह कंषाना के बंगले पर पूरे प्रदेश के कर्मचारियों के द्वारा गुहार लगाने पहुचे । संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमर सिंह जाटव ने बताया गया कि 4 जुलाई 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री माननीय शिवराज सिंह चौहान के द्वारा संविदा एक कलंक है का हवाला देते हुए पूरे मध्य प्रदेश के संविदा कर्मियों के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने संविदा नीति 2023 बना कर लागू की गई, जो कि विभाग में नियमित पदों के समकक्ष कर्मचारियों के समान संविदा कर्मियों को वेतन लाभ, अवकाश लाभ एवं सामाजिक सुरक्षा देने के लिए बनाई गई । जिसका प्रदेश के लगभग सभी विभागों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों के लिए यह संविदा नीति 01 अगस्त 2023 से लागू कर दी गई है किंतु कृषि विभाग की एक महत्वाकांक्षी योजना सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन “आत्मा” योजना के संविदा कर्मचारियों को आज दिनांक तक समकक्षता एवं वेतन निर्धारण से वंचित रखा गया जबकि इसी विभाग में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन में कार्यरत संविदा कर्मियों की समकक्षता का निर्धारण आदेश जारी किया जा चुका है, जबकि उक्त दोनों योजनाएँ केंद्र वित्त पोषित योजना है जोकि 60:40 ( केन्द्रांश 60% व राज्यांश 40% ) के पैटर्न पर संचालित है। विभाग द्वारा इस दोगले रवैया से परेशान होकर संपूर्ण कृषि संविदा कर्मचारी आज माननीय मंत्री जी से अपनी समकक्षता निर्धारण की गुहार लगाने के लिए आया हुआ है और उनसे अपील कर रहा है कि हमें भी इस संविदा नीति का लाभ 1 अगस्त 2023 से दिया जाए जिससे हमारा भी जीवन स्तर अच्छा एवं सामाजिक सुरक्षा मिल सके। माननीय मंत्री जी ने स्पष्ट कहा यह कि इनके लिए अलग से कानून है, क्या, जब सभी विभागों में समकक्षता के आदेश हो गए, तो इनका क्यों नहीं हुआ यह अन्याय है आदेश जारी करने हेतु आश्वस्त एवं निर्देश किए गए। यदि शासन-प्रशासन इस समस्या पर 15 दिवस के अंदर कोई कार्यवाही नहीं करता है तो मजबूरन संगठन को हड़ताल, आंदोलन या न्यायालय की शरण आदि कार्यों के लिए बाद्ध होना पड़ेगा जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।




